
मंदिर चलो
शाश्वत हिंदू (Eternal Hindu)
संघ व भाजपा के प्रखर विचारक श्री गोविंदाचार्य ने हिंदू जागरण हेतु एक पटल बनाया है।
Sangh and Bhajapa thinker Govindacharya Ji has created a site for Hindu revival.
शाश्वत देवालय (Shashwat Devalay)
शाश्वत हिंदू के अनेक प्रकल्पों में से एक है: शाश्वत देवालय।
Among their other projects, one project is Shashwat Devalay.
उद्देश्य (Goal)
मंदिर को पुनः समाज का केंद्र बिंदु बनाना।
घोष (Slogan)
दो घंटे मंदिर के नाम, राष्ट्र निर्माण के काम
संपर्क (Contact)
जगदीश छिपा,
कार्यालय सचिव
मोबाइल: 7568795343
साप्ताहिक बैठक (Weekly Meeting)
दिन: रविवार
समय: शाम 4 बजे
Google Link: https://meet.google.com/caa-zvqw-jit
Code: caa zvqw jit
विषय (Topic)
मंदिर समाज का केंद्र बिंदु बने – आप अपने मंदिर को कैसे दिशा देना चाहते है… आप क्या करेंगे और कैसे?
आप को सुनने और समझने हम सभी उत्सुक है।
युग भारती सदस्यों से अपेक्षा (Expectations from Yug Bharti Members)
शाश्वत देवालय बैठक उपस्थिति
प्रति सप्ताह बैठक में जाएँ, अपने विचार साझा करें।
मंदिर गमन
मंदिर जाएँ, मंदिर जाने की आवृत्ति बढ़ाएँ।
निवेदन (Request)
- यदि आप मंदिर नहीं जाते, तो मंदिर जाएँ।
- यदि आप मंदिर जाते हैं, तो नित्य जाएँ।
- यदि आप नित्य मंदिर जाते हैं, तो नित्य दो बार जाएँ।
- अपने परिवार व मित्रों को भी मंदिर ले जाएँ।
मंदिर कार्यक्रम
मंदिर के कार्यक्रमों में भाग लें।
निवेदन (Request)
- मंदिर के सभी कार्यक्रमों में भाग लें।
- अपने परिवार के कार्यक्रम मंदिर में करें।
- मंदिर में कार्यक्रम करने हेतु नए विचार उत्पन्न करें।
यथा:
– भजन, सत्संग
– जन्मदिन, वर्षगाँठ
– भोजन वितरण
– ओषधि वितरण
– शिक्षा एवं शिक्षण
– रक्तदान शिविर
– चिकित्सा शिविर
आदि
गीत: आओ हम मंदिर चलें
विषय सूची
- स्थायी पद (टेक)
- जन-आह्वान
- बाल-आकर्षण
- धर्मादेश
- उपयोगिता
- शंका-समाधान
- भक्त-स्मरण
- तीर्थ-स्मरण
- ईश उपस्थिति
- ईश-तंत्र
- समाज केंद्र
- व्यापकता
- दर्शन
स्थायी पद (टेक)
आओ हम मंदिर चलें,
आओ सब मंदिर चलें।
मंदिर अपना केंद्र-विंदु,
चलो सभी मंदिर चलें।
जन-आह्वान
चलो बहन, मंदिर चलें।
चलो भाई, मंदिर चलें,
चलो सखी, मंदिर चलें।
चलो सखा, मंदिर चलें।
आओ हम मंदिर चलें…
मात-पिता मंदिर चलें,
बहन-भाई मंदिर चलें।
सखी-सखा मंदिर चलें,
नारी-नर मंदिर चलें।
आओ हम मंदिर चलें…
चलो बाल, मंदिर चलें।
चलो तरुण, मंदिर चलें।
चलो प्रौढ़, मंदिर चलें।
चलो वृद्ध, मंदिर चलें।
आओ हम मंदिर चलें…
सुखी-दुखी मंदिर चलें,
स्वस्थ-रुग्ण मंदिर चलें।
धनी-दीन मंदिर चलें।
सुपढ़-अपढ़ मंदिर चलें…
आओ हम मंदिर चलें…
आओ सैनिक मंदिर में,
अधिकारी भी आओ जी।
कृषक वणिक तुम भी आओ,
साधु तो सबसे पहले।
आओ हम मंदिर चलें…
बाल-आकर्षण
घंटे की आवाज मधुर,
लपट आरती लाल-लाल।
चरणामृत मीठा प्रसाद,
सारे ही आनंद मिलें।
आओ हम मंदिर चलें…
कार्तिक में होती दीवाली,
शिव रात्रि हो फागुन में।
सावन भादों कृष्ण जन्म,
सारे उत्सव यहीं मनें।
आओ हम मंदिर चलें…
धर्मादेश
हिंदू हो तो कर पूजा,
हिंदू हो तो करो भजन।
हिंदू हो तो सुबह-शाम,
पग तेरे मंदिर चलें।
आओ हम मंदिर चलें…
चाहे उत्तर, चाहे दक्षिण,
चाहे हो पूरब-पश्चिम,
हो सकता परदेश बसे हों,
सभी जगह मंदिर मिलें।
आओ हम मंदिर चलें…
उपयोगिता
विद्यालय में मिले पढ़ाई,
मिले दुकान में सब सामान।
अस्पताल में मिले दवाई,
मंदिर में भगवान मिलें।
आओ हम मंदिर चलें…
विज्ञानी को प्रयोग-शाला,
अध्येता को ग्रंथ-भवन।
तार्किक के हित सभागार,
मंदिर भक्तों को मिलें।
आओ हम मंदिर चलें…
शंका-समाधान
मूरत है मिट्टी पत्थर,
पर उसमें रहती ईश-शक्ति।
मंदिर दिखता मात्र भवन,
भरी भक्ति कण-कण उसमें।
आओ हम मंदिर चलें…
हम कहते ईश्वर है मन में,
फिर क्यों जायें मंदिर हम?
याद रखें ईश्वर मंदिर में,
अब न स्वयं को हम छलें।।३।।
आओ हम मंदिर चलें…
यदि मन में ही सब कुछ होता,
तब क्यों जाते यहाँ-वहाँ?
जैसे जाते हाट-बाट,
वैसे ही मंदिर चलें।
आओ हम मंदिर चलें…
होटल में खाते खाना,
देखें फ़िल्म सिनेमा में,
यदि मिलना भगवान से,
क्यों न हम मंदिर चलें?
आओ हम मंदिर चलें…
भक्त-स्मरण
वाल्मीकि और वेद व्यास,
कबिरा, तुलसी, सूर दास।
रवि दास मीरा नानक,
जय जय जय जय हरि बोलें।
आओ हम मंदिर चलें…
तीर्थ-स्मरण
जन्मे राम अयोध्या में,
वृंदावन में खेले कृष्ण।
महादेव की नगरी काशी,
मंदिर में सब तीर्थ मिलें।
आओ हम मंदिर चलें…
बदरी नाथ हिमालय में,
दक्षिण में बैठे तिरुपति।
दिशा पूर्व में जगन्नाथ,
देखो कितने मुख बदले।
आओ हम मंदिर चलें…
ईश-उपस्थिति
राम जानकी मंदिर में,
मंदिर में ही राधे श्याम।
मंदिर स्थित गौरी शंकर,
देव युगल सब वहीं मिलें।
आओ हम मंदिर चलें…
वाणी लक्ष्मी दुर्गा काली,
रहें देवियाँ मंदिर में।
हनुमान विष्णु गणेश,
मंदिर में सब देव मिलें।
आओ हम मंदिर चलें…
ईश-तंत्र
सृष्टि बनाते ब्रह्मा जी,
पालन करते महा विष्णु,
बढ़ते जब भी पाप अधिक,
शंकर धरती पद दलें।
आओ हम मंदिर चलें…
वायु देवता पवन चलाते,
नीर बहाते वरुण देव।
अग्नि में जलता सब कुछ,
इनके राजा इंद्र भले।
आओ हम मंदिर चलें…
समाचार दें नारद जी,
लेखा रखते चित्रगुप्त,
धन प्रबंध करते कुबेर,
अंत प्राण यमराज हरें।
आओ हम मंदिर चलें…
गर्मी मिलती सूरज से,
शीत हमें देता चंदा।
राहु-केतु, बुध-मंगल,
शनि शुक्र न कभी टलें।
आओ हम मंदिर चलें…
समाज-केंद्र
मंदिर में लगता मेला,
मंदिर में ही सजे हाट।
होए चिकित्सा मंदिर में,
सब शिक्षा भी वहीं मिले।
आओ हम मंदिर चलें…
नामकरण हो मंदिर में,
मंदिर में यज्ञोपवीत,
गठ-बंधन औ गुरु-पूजन,
सब मंदिर बरगद तले।
आओ हम मंदिर चलें…
व्यापकता
मंदिर सरिता के तट पर,
मंदिर पर्वत के ऊपर।
मंदिर घन वन के अंदर,
कहाँ नहीं मंदिर मिलें।
आओ हम मंदिर चलें…
गली मोहल्ले की मठिया,
ग्राम-नगर के भवन भव्य।
कच्चा पक्का गोल तिकोना,
हर मंदिर भगवान मिलें।
आओ हम मंदिर चलें…
शंकर ने सब धाम बनाए,
विक्रम ने निर्माण किया।
होते जन हित श्रेष्ठ कर्म,
साधु-राजा जब मिलें।
आओ हम मंदिर चलें…
दर्शन
जगत बनाया ईश्वर ने,
ईश्वर ने तन-मन बनाया।
ईश सृष्टि का विशद वृक्ष है,
चल उस तरुवर तल पलें।।१।।
आओ हम मंदिर चलें…
वेद चार दश अष्ट पुराण,
सौ से ज्यादा उपनिषद।
रामायण औ जय-भारत,
कथा ज्ञान सब मिलें-जुलें।
आओ हम मंदिर चलें…
पीछे जीवन आगे जन्म,
किए पाप औ किए पुण्य।
नहीं पता कब कहुँ कैसे,
अपने सबके कर्म फलें।
आओ हम मंदिर चलें…
बिजलीघर में बिजली बनती,
तारों से आती घर में।
मंदिर में ईश्वर रहता,
भक्ति से आता घर में।
आओ हम मंदिर चलें…
सूरज देता प्रकाश ऊष्मा,
जिससे सबका जीवन चलता।
यदि जीवन को अक्षय रखना,
नन्हे सूरज बन हम जलें।।२।।
आओ हम मंदिर चलें…
अग्नि जलाती तेल घृत,
जलें अग्नि में वस्त्र-पत्र।
ईश-अग्नि में जला अहं,
पूत-विभूति मस्तक मलें।
आओ हम मंदिर चलें…