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विद्यालय का इतिहास

विद्यालय का इतिहास

*पँ. दीनदयाल उपाध्याय सनातन धर्म विद्यालय का इतिहास*

तत्वदर्शी, युगद्रष्टा, महान चिंतक पँ. दीनदयाल उपाध्याय जी की निर्मम हत्या से एक महियषी महिला आदरणीया श्रीमती सुशीला नरेंद्रजीत सिंह जी (जिन्हें सब आदर व सम्मान से ‘बूजी’ कहकर बुलाते थे) के अंतर्मन में एक दृढ़ विचार पनपा कि ऐसे एक शिक्षण संस्थान की स्थापना होनी चाहिये जहां पँ दीनदयाल उपाध्याय जी के विचारों से पोषित समाजोन्मुखी विद्यार्थियों का निर्माण हो, ताकि उनके राष्ट्रार्पित जीवन से राष्ट्रनिर्माण का लक्ष्य प्राप्त किया जा सके। आदरणीया बूजी की इस पवित्र भावना को आदरणीय भाऊराव देवरस जी, बैरिस्टर नरेंद्रजीत सिंह जी, प्रो0 रज्जू भैया जी, बापूराव मोघे जी, अशोक सिंघल जी जैसे तत्कालीन राष्ट्रवादी महापुरुषों के द्वारा सम्बल मिला और श्री ब्रह्मावर्त सनातन धर्म महामंडल द्वारा उपलब्ध कराई गई भूमि पर महान संगठनकर्ता, प्रख्यात विचारक और समाजसेवी स्वo माधवराव सदाशिवराव गोलवरकर जी (गुरूजी) के पुण्य कर-कमलों से २३ फरवरी सन १९७० को कानपुर के नवाबगंज क्षेत्र में पँo दीनदयाल उपाध्याय सनातन धर्म विद्यालय का शिलान्यास हुआ।

चूंकि विद्यालय स्थापना का संकल्प किसी उत्कृष्ट भवन संरचना की बजाए एक पवित्र भावना पर निर्भर था और यह निर्णय हुआ था कि विद्यालय का आरंभ आगामी सत्र अर्थात जुलाई माह से ही किया जाना है, अतः गुरु पूर्णिमा के शुभ दिवस पर १८ जुलाई १९७० को सरस्वती शिशु मंदिर, तिलक नगर के भवन में ही पँo दीनदयाल उपाध्याय सनातन धर्म विद्यालय की स्थापना कर दी गयी तथा प्रवेश परीक्षा के बाद २४ छात्रों के साथ श्री चंद्रपाल सिंह जी (संस्थापक प्रधानाचार्य), श्री ओमशंकर त्रिपाठी जी एवं श्री प्रयाग सिंह जी के शिक्षकत्व में विद्यालय प्रारम्भ हुआ। एक सत्र पश्चात सन १९७१ में यह विद्यालय नवाबगंज स्थित अपने मूल भवन में स्थानांतरित हुआ। तत्कालीन राज्यपाल द्वारा विद्यालय को विशिष्ट श्रेणी की मान्यता प्राप्त हुई जो प्रारम्भ में जूनियर हाईस्कूल स्तर तक के लिए थी। तत्पश्चात हाईस्कूल तथा इंटरमीडिएट की मान्यता विज्ञान वर्ग के अंतर्गत माध्यमिक शिक्षा परिषद, उ0प्र0 के द्वारा प्रदान की गई।

हाईस्कूल की बोर्ड परीक्षा में विद्यालय के प्रथम बैच के ही एक छात्र (श्री शशि शर्मा जी) ने प्रदेश स्तरीय मेरिट में स्थान प्राप्त कर शिक्षा के क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित किया। आपातकाल के दुरूह काल में भी विद्यालय अपने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में रत रहा और इस संस्कारशाला का दीप अनवरत प्रदीप्त रहा। शिक्षा के साथ-साथ क्रीड़ा के क्षेत्र में भी विद्यालय के विद्यार्थियों ने प्रदेश स्तर तक सफलता के ढेरों प्रतिमान स्थापित किए। जिस भावना और संकल्प के साथ विद्यालय का निर्माण हुआ था यह उसी का परिणाम रहा कि प्रदेश के हिंदी माध्यम के विद्यालयों की सूची में पँo दीनदयाल उपाध्याय सनातन धर्म विद्यालय का नाम शीर्ष के विद्यालयों में ही रहा। सन २०१३ में विद्यालय सीबीएसई बोर्ड से सम्बद्ध हो गया।