युग भारती परिचय – About Us

पंडित दीनदयाल उपाध्याय​, आधुनिक भारत के उन गिने-चुने राष्ट्रीय नेताओं में से थे जिन्होंने स्वेच्छा पूर्वक अतिशय त्याग​मय जीवन का ​वरण तो किया ​ही साथ ही उदात्ततम समाजोन्मुखी चिंतन का प्रसार करते हुए अपने देश की प्राचीन ​आर्ष परंपरा को पुन: प्रतिष्ठित भी किया​। स्वाभाविक रूप से ऐसे तपस्वी के ​निर्मम अंत ने समाज के सभी संवेदनशील लोगों को झकझोर दिया​, परिणाम​त: वे उस परंपरा को मिटने न देने हेतु प्रस्तुत हो उठे​। कानपुर में इस कार्य का बीड़ा उठाया स्मृति शेष श्रीमती सुशीला नरेंद्रजीत सिंह ​’​बूजी​’ ने और अपना सर्वस्व लगाकर 18 जुलाई 1970 को पंडित दीनदयाल उपाध्याय  सनातन धर्म विद्यालय की स्थापना की​।

विद्यालय का विकास​, संख्या अथवा प्रसिद्ध बढ़ाने की नहीं वर​न धैर्य पूर्वक दीनदयाल जी के आदर्शों को पल्लवित​-पुष्पित करने की दृष्टि से किया गया​। विद्यालय से शिक्षा प्राप्त छात्र देश-विदेश के विविध क्षेत्रों में सफलतापूर्वक कार्यरत हैं​। यह सभी​ पूर्व छात्र चतुर्दिक व्याप्त स्वार्थां​धता से मुक्त​स्वयं को एक ​वृहत्तर परिवार का सदस्य मानते हैं तथा अपने विद्यालय​, अपने देश​, अपने समाज के लिए कुछ करने की ​ललक​, आत्मविश्वास और क्षमता से भी परिपूर्ण है​। ऐसे ही ​उत्साही और संकल्पित पूर्व छात्रों को एक साथ जोड़े रखने के लिए ही ​“​युग भारती​” संस्था का निर्माण हुआ​।

लंबे समय से समाज में व्याप्त वि​भ्रम को दूर करना​ ही “युग भारती​” का संकल्प है​।​”एक दीनदयाल गया तो क्या​, हम अनेक दीनदयाल बनाएंगे​”​ – विद्यालय संस्थापकों की इस भावना को मूर्त करना और उन दीनदयालों के माध्यम से भारत के ग्राम​-ग्राम को परम वैभव तक पहुंचाना ही ​“युग भारती​”  का चरम लक्ष्य है​।